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ट्रेन से फेंकी गई छात्रा की हालत बेहद नाजुक

ट्रेन से फेंकी गई छात्रा की हालत बेहद नाजुक

भोपाल। मंगलवार रात बीना स्टेशन के पहले बदमाशों की हैवानियत का शिकार हुई 29 वर्षीय छात्रा ऋतु त्रिपाठी को अब तक होश नहीं आया है। डॉक्टरों के मुताबिक ऋतु की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उसके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें हैं। हमीदिया अस्पताल में जब छात्रा की हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे गुरूवार को बंसल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इधर, विशेष महानिदेशक रेल ने ऋतु को ट्रेन से फेंकने वाले बदमाश का स्कैच जारी किया है। आरोपियों पर दस हजार रूपए का इनाम भी घोषित किया है।
ऋतु का हाल-चाल जानने गुरूवार सुबह गृहमंत्री बाबूलाल गौर और विशेष महानिदेशक रेल मैथलीशरण गुप्त अस्पताल पहुंचे। गौर ने युवती का समुचित इलाज करने के साथ एसपी रेल को घटनास्थल पर जांच करने के निर्देश दिए। गुप्त ने बताया कि इस घटना के संबंध में ट्रेन में मौजूद टीसी से भी पूछताछ की गई है। उसने ललितपुर से बदमाशों को बैठाने से फिलहाल इनकार किया है। वहीं, डीआरएम राजीव चौधरी ने मामले की जांच के लिए मंडल रेल प्रबंधक झांसी को उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने के लिए पत्र लिखा है।
बेटी बहादुरी से बदमाशों से लड़ी, मुझे उस पर गर्व है
मालवा एक्सप्रेस में लुटेरों का साहसपूर्वक सामना करने वाली ऋतु की मां भी उसकी तरह ही साहस की मिसाल बनकर अस्पताल में बेटी के स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं। ऋतु की मां मिथ्या त्रिपाठी कहती हैं, उन्हें अपनी बेटी पर फख्र है कि उसने इतनी बहादुरी से बदमाशों के साथ मुकाबला किया। मिथ्या कहती हैं, अगर टीसी ट्रेन रोक देता तो ऋतु को समय पर इलाज मिल सकता था। टीसी की लापरवाही उसकी हालत और ज्यादा बिगड़ गई और आज वह जिंदगी और मौत से जूझ रही है।

मुझे मुआवजा नहीं, इंसाफ चाहिए
ऋतु के परिजनों ने जीआरपी से मुआवजा लेने से इंकार कर दिया है। उसकी मां मिथ्या ने रेल अधिकारी से कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी चाहिए। जिससे मेरी बेटी को न्याय मिल सके।

महाकाल से मन्नत मांगने जा रही थी
उज्जैन में बेटी का इंतजार कर रही मां मिथ्या को जब उसके हादसे में घायल होने की खबर मिली तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। ऋतु ने अपनी मां को फोन करके बताया था कि बाबा महाकाल सबकी मनोकामना पूरी करते हैं, मैं मन्नत मांगने उज्जैन जा रही हूं।

यह था मामला
ऋतु मंगलव्रोई लुटेरा उसका पर्स निकालकर भाग रहा है, ऋतु ने जब एक बदमाश को कोच के गेट के पास पकड़ा तो उसने ट्रेन से नीचे फेंक दिया। कोच में सवार अन्ययात्रियों ने जब टीसी से ट्रेन रूकवाने की मांग की तो उसने मना कर दिया। ऋतु दिल्ली में एक कोचिंग सेंटर में जॉब और पढ़ाई करती है।

डेड पॉइंट पर दिया वारदात को अंजाम
बीना स्टेशन से पहले करोंदा रेलवे का डेड प्वाइंट है। यहां ट्रेन 20 से 30 किलो मीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती है। जांच में सामने आया है कि बदमाश डेड पॉइंट से अच्छी तरह से वाकिफ थे। इस कारण उन्होंने वारदात के लिए करोंदा स्थित डेड प्वाइंट को चुना।

नहीं मिला सही उपचार
ऋतु की मां ने हमीदिया अस्पताल प्रशासन के पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हमीदिया पहुंचने के चार घंटे बाद तक ऋतु के सिर से खून बह रहा था लेकिन हमीदिया के डॉक्टर उसे भी नहीं रोक पाए।
मालवा एक्सप्रेस के एस-7 कोच के 12 नंबर बर्थ पर मैं सवार था। ऋतु बर्थ-7 पर सो रही थी। सुबह करीब पांच बजे ओ…भैया, ओ…भैया की जोर-जोर से आवाज आई। कोच में सवार यात्री नींद से जागे तो देखा कि कोच के गेट के पास एक शॉल पड़ी थी। वहीं गेट के पास स्थित बर्थ पर बैग रखा था। आठ नंबर की बर्थ खाली थी। संदेह हुआ कि चीखने वाली लड़की ऋतु ही थी। इसकी सूचना टीसी से ट्रेन रोकने को कहा, लेकिन वह बीना में घटना की जानकारी देने की बात कहकर एस-8 कोच में चला गया।
स्वतंत्र जैन, चश्मदीद, (जीआरपी को बयान में बताया)

सरपंच की पत्नी ने दी सूचना
बताया जा रहा है कि करोंदा के सरपंच बबलू राय की पत्नी ने युवती को पटरियों को पास पड़े हुए पाया था। वह मार्निंगवॉक पर निकली थी। उसने सबसे पहले अपने पति को इस बारे में बताया, बाद में सरपंच ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को हादसे की सूचना दी।

Source www. patrika.com

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