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कलेक्टर निशांत वरवड़े के बंगले में भी मिला डेंगू का लार्वा

कलेक्टर निशांत वरवड़े के बंगले में भी मिला डेंगू का लार्वा

भोपाल (नप्र)। पांच साल पहले (वर्ष 2009) की तरह इस साल भी डेंगू मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग के पूर्वानुमान में ऐसा बताया जा रहा है। अरेरा कॉलोनी और चार इमली जैसे वीआईपी इलाके में भी डेंगू के लार्वा मिल रहे हैं। लार्वा सर्वे करने गई टीम को कलेक्टर निशांत वरवड़े के बंगले में भी डेंगू का लार्वा मिला है।
इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलेंस प्रोग्राम द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि दो हफ्ते से लगातार डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं। आगे भी इस बीमारी के ज्यादा फैलने की आशंका है। मंगलवार को पांच नए मरीज मिले हैं। इसके एक दिन पहले भी इतने ही मरीज मिले थे।
गौरतलब है कि 2009 में सितंबर में ही डेंगू फैलना शुरू हुआ था। करीब 300 लोग इसकी चपेट में आए थे, इनमें 32 की मौत हो गई थी। इस सीजन में अब तक राजधानी में डेंगू मरीजों की संख्या 148 तक पहुंच गई है। इसके अलावा कुछ मरीजों का क्लीनिकल डायग्नोसिस के आधार पर इलाज किया गया। इस तरह आंकड़ा डे़ढ़ सौ से ऊपर पहुंच गया है। करीब एक महीने पहले मरीजों की संख्या कम होने के बाद एक बार फिर बढ़ी है। हर दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं। एक दिन में मरीजों की संख्या 5 तक पहुंच रही है। अब तक दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. केबी वाजपेयी ने कहा कि रुक-रुककर बारिश की वजह से डेंगू के मच्छर बढ़ रहे हैं।
केरोसिन भी खत्म
डेंगू प्रभावित इलाकों में पायरेथ्रम का छिड़काव किया जाता है। करोसिन का तेल मिलाकर इसका छिड़काव किया जाता है। सूत्रों ने बताया कि केरोसिन की स्टाक खत्म हो गया है। इस वजह से रोकथाम का काम प्रभावित हो सकता है।
कोलार में 31 मरीज
इन दिनों सबसे ज्यादा मरीजा कोलार इलाके में मिल रहे हैं। यहां अब तक मरीजों की संख्या 31 हो गई है। मलेरिया विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यहां पर पानी की सप्लाई टैंकर से होने की वजह से पानी स्टोर कर रखा जाता है। इस वजह से डेंगू के लार्वा पल रहे हैं। बता दें कि कोलार इलाके में एक मरीज की मौत भी हो चुकी है।
इस तरह बढ़ रहे मरीज
36वां हफ्ता 16 > 37 वां हफ्ता 18 > 38वां हफ्ता 24 > 39 वां हफ्ता 10 (दो दिन में)
जांच की भी छुट्टी
डेंगू को लेकर प्रदेश भर में हाई अलर्ट होने के बाद भी छुट्टी के दिन जांच नहीं हो रही है। यह हाल जेपी , हमीदिया अस्पताल समेत मलेरिया कार्यालय का भी है। हर दिन करीब 20 सैंपल जांच के लिए विभिन्न अस्पतालों से आते हैं, उनकी अगले दिन जांच की जाती है।
सीरोटाइप जांच के लिए दोबारा नहीं भेजे नमूने
डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप होते हैं। राजधानी और आसपास के इलाके में कौन सा सीरोटाइप है, यह डॉक्टरों को भी पता नहीं है। ऐसे में मरीजों को इलाज तो मिल जाता है, पर डेंगू की रोकथाम के लिए कारगार उपाय नहीं हो पा रहे हैं। दो महीने पहले मलेरिया विभाग की लैब से 18 पाजीटिव मरीजों के नमूने जांच के लिए आरएमआरसीटी जबलपुर में भेजे गए थे। लेकिन, गलती से सीरोटाइप की जगह यहां डेंगू की सामान्य जांच कर दी गई है। उसके बाद आज तक जांच के लिए नमूने नहीं भेजे गए। विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार एक सीरोटाइप से संक्रमण होने के बाद अगर उस मरीज को दूसरे सीरोटाइप से संक्रमण होता है तो मरीज की मौत होने की 90 फीसदी तक आशंका रहती है।

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