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हाईकोर्ट का फैसला, भोपाल में नहीं देना होगा नर्मदा उपकर -

हाईकोर्ट का फैसला, भोपाल में नहीं देना होगा नर्मदा उपकर –

भोपाल (नप्र)। नगर निगम के नर्मदा उपकर को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक और अवैध करार दिया। कोर्ट ने नर्मदा टैक्स के रूप में वसूली गई राशि को 9 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने के निर्देश निगम को दिए हैं। टैक्स लेकर सरकारी आदेशों को न्यायालय ने रद्द कर दिया है। यह फैसला बिल्डर्स एवं कॉलोनाइजर्स की एसोशिएसन (क्रेडाई) व 30 अन्य की याचिका पर आया है। कोर्ट के फैसले के बाद अब यह लागू नहीं होगा।

इन सभी याचिकाओं पर अक्टूबर, 2014 में अंतिम सुनवाई हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने अंतिम आदेश के लिए इसको आरक्षित कर लिया था। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीपति एएम खानविलकर एवं न्यायाधिपति एसएस केमकर की युगलपीठ ने अपने विस्तृत अंतिम आदेश में राज्य शासन एवं नगर निगम भोपाल द्वारा अधिरोपित ‘नर्मदा उपकर को असंवैधानिक एवं अवैध करार देते हुए इससे संबंधित सभी शासकीय आदेशों को निरस्त कर दिया। याचिकाकर्ता क्रेडाई की तरफ से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पैरवी की।

उन्होंने तर्क दिया कि जिन समान दरों पर नर्मदा उपकर सभी आवेदकों कोअनिवार्य किया गया, वह पूर्णत: असंवैधानिक है, क्योंकि वस्तुत: शासन को सभी तरह के निर्माणों पर एक समान दर पर टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है। गुप्ता ने तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का नर्मदा उपकर के अधिरोपण में खुला उल्लंघन हुआ है। जिस कारण वह पूर्णत: असंवैधानिक हो जाता है। उनके तर्कों पर युगल पीठ ने अपने विस्तृत अंतिम आदेश में टैक्स अधिरोपण को पूर्णत: असंवैधानिक एवं अवैध घोषित किया।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि नर्मदा उपकर की दर सभी तरह के निर्माणों पर बिना उसकी प्रकृति, उपयोग, गतिविधि का निर्धारण किए लगाई गई है। जिससे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होता है। इससे संबंधित। भर शासकीय आदेश निरस्त किए जाते हैं एवं याचिकायें स्वीकृत की जाती हैं। हालांकि इस संबंध में नगर निगम अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं।

ब्याज सहित वापस करना होंगे 40 करोड़

शहर के विभिन्न बिल्डरों एवं कॉलोनाइजरों ने 50 प्रतिशत राशि हाईकोर्ट में व 50 फीसदी नगर निगम में जमा कराई। लगभग 40 करोड़ की राशि कर के रूप में जमा कराई थी। यह राशि राशि अब 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाई जाएगी। नर्मदा परियोजना में होने वाले खर्च की वसूली के लिए निगम यह टैक्स लगाया था। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

अब लागू नहीं होगा नर्मदा कर

इससे पहले निगम ने टैक्स 2006 में लागू किया था। जिसको हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने 2009 में यह टैक्स निरस्त कर दिया। लेकिन इसके बाद फिर से नर्मदा उपकर के नाम से टैक्स लगा दिया। जिसको लेकर यह फैसला आया है। कोर्ट के मापदंडों के अनुसार निगम अब नर्मदा टैक्स तीसरी बार नहीं लगा पाएग
source www.naidunia.com

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