Home » मध्यप्रदेश » भोपाल » टाइगर स्टेट का दर्जा तो दूर, दूसरे पायदान से भी फिसला मप्र
टाइगर स्टेट का दर्जा तो दूर, दूसरे पायदान से भी फिसला मप्र

टाइगर स्टेट का दर्जा तो दूर, दूसरे पायदान से भी फिसला मप्र

भोपाल (ब्यूरो)। मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिलना तो दूर, उलट वह दूसरे से तीसरे पायदान पर चला गया। यह स्थिति तब है जब मप्र में देश के सबसे अधिक 6 टाइगर रिजर्व हैं। हालांकि पिछले सेंसेक्स की तुलना में संख्या बढ़ी है।

वर्ष 2010 में प्रदेश में जहां टाइगर की संख्या 257 थी, वह चार साल बाद नई गणना में 308 है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की नई रिपोर्ट के हिसाब से देश में 30 प्रतिशत टाइगर बढ़े हैं। 2010 में जहां 1706 टाइगर थे, वह अब बढ़कर 2226 हो गए हैं। नईदुनिया ने 29 जुलाई 2014 को ही मप्र को नहीं मिल पाएगा ‘टाइगर स्टेट का दर्जा” शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर वन विभाग की लापरवाही की पोल खोली थी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 पहले तक मप्र में बाघों की संख्या सबसे अधिक होने से टाइगर स्टेट का दर्जा बरकरार था। ऐसा भी मौका आया जब मप्र में करीब 700 टाइगर थे। वाइल्ड इंस्टीट्यूट देहरादून ने वर्ष 2006 में टाइगर की संख्या 300 बताई थी, जो 2010 में 257 रह गई। दरअसल वर्ष 2007 से 09 के टाइगर का बड़ी संख्या में शिकार हुआ। पन्ना नेशनल पार्क तो बाघविहीन हो गया।

मामला गंभीर होने पर केन्द्र ने जांच दल भेजा था। जांच में वन्य प्राणी मुख्यालय के आला अफसरों सहित तत्कालीन प्रमुख सचिव वन अवनि वैश्य को लापरवाही के लिए जिम्मेदार भी ठहराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन वन मंत्री सरताज सिंह ने सीबीआई जांच कराने का लिखा था, लेकिन तत्कालीन प्रमुख सचिव वैश्य मुख्य सचिव बन चुके थे। ऐसे में पूरी फाइल को ठंडे बस्ते में चली गई थी।

एक टाइगर पर हर साल 11.67 लाख खर्च

मप्र में एक टाइगर का सालाना खर्च साढ़े ग्यारह लाख स्र्पए है, जबकि अन्य राज्यों में यह 8 लाख 80 हजार है। 2010 की गिनती के अनुसार देश भर में कुल 1706 टाइगर थे, इनके रखरखाव के लिए केन्द्र सरकार प्रति वर्ष 150 करोड़ स्र्पए देती है, जो कि प्रति टाइगर 8 लाख 80 हजार स्र्पए होता है। वहीं मप्र को 257 बाघों के हिसाब से 30 करोड़ मिलते हैं जो प्रति बाघ 11 लाख 67 हजार स्र्पए होते हैं।

बाघों की गिनती चार साल बाद वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून के द्वारा की जाती है। प्रदेश के पांच टाइगर रिजर्व की गिनती में 51 बाघ बढ़े हैं। अभी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की गिनती चल रही है। हमें उम्मीद है कि हमारी स्थिति अच्छी रहेगी।

source www.naidunia.com

Check Also

भोपाल - पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न

भोपाल – पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न

भोपाल – कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आज मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंचायत श्री हरजिन्दर सिंह की अध्यक्षता …

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *