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कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार फसलों का रोडमेप बनेगा

कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार फसलों का रोडमेप बनेगा

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मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज लाल परेड ग्राउण्ड में हलधर कृषि एक्सपो के शुभारंभ कार्यक्रम में 20 हजार से अधिक गाँव के लोगों से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम का इलेक्ट्रानिक चेनलों से सीधा प्रसारण किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ग्यारह कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार बोयी जाने वाली फसलों, बीज और खाद का रोड मेप बनाया जायेगा। इसके आधार पर अगले कृषि महोत्सव में किसानों को उनके जलवायु क्षेत्र के अनुसार फसलों की वैज्ञानिक योजना बतायी जायेगी। अध्यक्षता कर रहे केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने कहा कि देश में कृषि का स्तर ऊपर करने में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। अगले तीन साल में देश के हर किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करवाया जायेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों से अपील की कि फसल चक्र परिवर्तित करें, उन्नत खेती करें, अपने गाँव को स्वच्छ बनायें तथा पानी की एक-एक बूँद बचायें। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियाँ पड़ाव हैं मंजिल नहीं। इसे और आगे बढ़ाकर अब हमें नये मध्यप्रदेश का निर्माण करना है। अब किसानों की आमदनी बढ़ाने के लक्ष्य को लेकर काम करना है। उन्होंने कहा कि हर किसान अपने खेत के एक हिस्से में फल, फूल, सब्जी या औषधि फसलों की खेती करेगा क्योंकि इससे आय बढ़ेगी। यदि किसान या उनके बच्चे कृषि उत्पादों पर आधारित खाद्य प्र-संस्करण उद्योग लगाते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना में दस लाख से लेकर एक करोड़ तक का ऋण उपलब्ध करवाया जायेगा। इस ऋण की गारंटी राज्य सरकार लेगी। कृषि में मध्यप्रदेश द्वारा हासिल सर्वाधिक विकास दर के पीछे किसानों की कड़ी मेहनत और राज्य सरकार की ऋण नीति है। इसमें सिंचाई का रकबा बढ़ाया गया, अधूरी सिंचाई योजनाएँ पूरी की गई, नयी सिंचाई योजनाएँ शुरू की गई, नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुँचाया गया, किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध करवाया गया, किसानों को सिंचाई के लिये बिजली उपलब्ध करवाई गई और अच्छे बीज उपलब्ध करवाये गये। श्री चौहान ने कहा कि मालवा को रेगिस्तान बनने से बचाने के लिये नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना शुरू की गई। अब नर्मदा को गंभीर, काली सिंध और पार्वती नदी से जोड़ा जायेगा। बेतवा-केन नदी परियोजना को प्राथमिकता से पूरा किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार प्रदेश में किसानों को 2187 करोड़ का फसल बीमा वितरित किया गया है। किसानों को 3000 करोड़ की राहत राशि, 1300 करोड़ का बोनस, 4000 करोड़ बिजली पर सब्सिडी और 560 करोड़ रुपये शून्य प्रतिशत ब्याज के बदले सहकारी बेंकों को दिये गये। सब्सिडी मिलाकर केवल एक वित्तीय वर्ष में किसानों को 12 हजार करोड़ की मदद की गई है। अब फसल चक्र बदलने के लिये उद्यानिकी फसलों की ओर किसानों को बढ़ना होगा। दूध के उत्पादन को बढ़ाना होगा। आधुनिक खेती से उत्पादन बढ़ाने के लिये कृषि यंत्रों का उपयोग करना होगा। इन्हीं बातों की जानकारी देने के लिये प्रदेश में कृषि महोत्सव हो रहा है। किसानों को जागरूक करने के लिये प्रत्येक विकासखण्ड तथा लगभग 12 हजार गाँव में कृषि रथ जा रहा है।

श्री चौहान ने कहा कि कृषि महोत्सव को अपना कार्यक्रम बनायें। उन्होंने कहा कि आगामी एक जनवरी से किसानों को लोक सेवा केन्द्र से खसरे की ई-नकल मिलेगी। सभी शासकीय योजनाओं में शपथ-पत्र की व्यवस्था को समाप्त किया जा रहा है। श्री चौहान ने आव्हान किया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत हर गाँव-शहर को स्वच्छ बनायें। खुले में शौच की प्रवृत्ति को रोके और गाँव के हर घर में शौचालय बनायें। गाँवों में सड़कें, बिजली, पानी, स्कूल की व्यवस्था की जा रही है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने कहा कि किसान और कृषि देश की जीवन रेखा हैं। देश को मजबूत बनाने के लिये किसान और गाँव को मजबूत बनाना होगा। देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान कम होता जा रहा है। देश की कृषि विकास दर 4 प्रतिशत है जबकि मध्यप्रदेश की 24 प्रतिशत है। देश के कई राज्य ने केन्द्र द्वारा कृषि विकास के लिये दी जाने वाली राशि पूरी खर्च नहीं की जबकि मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्ष में दी गई राशि पूरी खर्च की है। मध्यप्रदेश में दूध उत्पादन और कुक्कुट पालन का लक्ष्य भी प्राप्त किया है। देश के अन्य राज्यों को मध्यप्रदेश को लगातार दो बार कृषि कर्मण अवार्ड मिलने पर आश्चर्य होता है। देश में विपरीत मौसम के बाद भी किसानों की मेहनत तथा कृषि मंत्रालय के प्रयासों से केवल तीन प्रतिशत बुवाई कम हुई है। यहाँ भी मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है जिसने शत-प्रतिशत बुआई की। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण देना और बोनस देना साहसिक तथा ऐतिहासिक काम है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि हर किसान के पास मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करवाने का लक्ष्य केन्द्र सरकार द्वारा तीन साल में पूरा किया जायेगा। कुल साढ़े चौदह करोड़ किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करवाया जायेगा। इसी वित्तीय वर्ष से किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुये नई कृषि बीमा योजना लागू की जायेगी। उन्होंने कहा कि पशुओं की देशी नस्लों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव नहीं होता है। इसे ध्यान में रखते हुए पशुधन सुधार के लिये राष्ट्रीय गोकुल मिशन स्थापित किया गया है। इसमें राष्ट्रीय कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर स्थापित किया जायेगा, जो देशी गायों की नस्लों में सुधार के लिये कार्य करेगा। प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना शुरू की गई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में इस वर्ष 14 हजार करोड़ खर्च किये जायेंगे। इसी वर्ष दो नये राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान और कृषि का केन्द्रीय विश्वविद्यालय शुरू किया जायेगा।

स्वागत भाषण में प्रदेश के कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने कृषि महोत्सव के कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 313 विकासखण्ड की 12 हजार ग्राम पंचायत तक कृषि क्रांति रथ पहुँचेगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान और केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री सिंह ने किसानों को राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के दावा प्रमाण-पत्रों का वितरण किया। इसके पहले उन्होंने एग्री-एक्सपो में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में कृषि के यंत्रीकरण के लिये तीन एम.ओ.यू. हस्ताक्षर किये गये।

कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, पशुपालन एवं उद्यानिकी मंत्री सुश्री कुसुम महदेले, पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी, सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान, सांसद श्री आलोक संजर, राज्य कृषक आयोग के अध्यक्ष श्री कैलाश पाटीदार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मीना हिम्मत सिंह, विधायक श्री विष्णु खत्री, मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री आर.के. स्वाई और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने किया।

 

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