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लोकसभा अध्यक्ष के तेवर देखकर सक्रिय हुआ रेल मंत्रालय!

लोकसभा अध्यक्ष के तेवर देखकर सक्रिय हुआ रेल मंत्रालय!

आशीष दुबे,नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का कड़ा रूख सामने आने के बाद मध्यप्रदेश की लंबित रेल परियोजनाओं को गति मिलने की संभावना बढ़ी है। इनकी समीक्षा तथा जरूरी कदम उठाने के संबंध में विचार करने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु संभवत: एक जनवरी को इंदौर पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे इंदौर क्षेत्र को कुछ नई सौगातें भी देंगे।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक रेल मंत्रालय ने मप्र की लंबित परियोजनाओं को सिरे चढ़ाने की कवायद नए सिरे से शुरू की है। वजह यह है कि इंदौर से सांसद व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने काफी समय से इंदौर समेत समूचे मप्र में रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए जोर दे रही हैं।
इसी कड़ी में बीती रात यहां महाजन ने प्रभु व आधा दर्जन सांसदों की बैठक बुलाई थी। चौबीस घंटे में ही इसका असर यह हुुआ कि रेल मंत्री का आगामी एक जनवरी को इंदौर जाने का कार्यक्रम बनने लगा है।
सूत्रों का कहना है कि वे इंदौर से जम्मूतवी के लिए नई रेल को हरी झंडी दिखाएंगे, एक कांप्लेक्स का लोकार्पण करेंगे तथा प्रस्तावित परियोजनाओं समेत बरसों से लंबित इंदौर-मनमाड़ के रेल लाइन के संबंध में वरिष्ठ रेल अधिकारियों व मप्र सरकार के अफसरों से चर्चा करेंगे। परियोजना के लिए निजी भागीदार की तलाश और स्पेशल परपज व्हीकल(एसपीवी)का गठन इस चर्चा का प्रमुख बिंदु होगा।
मप्र को निजी भागीदार तलाशने की हिदायत: सूत्र बताते हैं कि रेल मंत्रालय ने मप्र सरकार को हाल में साफ कर दिया है कि अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर ही सूबे की बड़ी रेल परियोजनाओं का काम हाथ में लिया जा सकेगा। हालांकि इसमें आ रही व्यवहारिक दिक्कतों व ताई के दबाव के चलते रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने महाजन को आश्वस्त किया है कि इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन के लिए रेलवे ही ज्यादा राशि लगाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रभु का यह दौरा तभी रद्द हो सकता है, जब एक जनवरी तक इंदौर नगर निगम चुनाव के लिए आचार संहिता प्रभावी हो जाए। यदि ऐसा हुआ तो समीक्षा बैठक दिल्ली में होगी।
मप्र की महत्वपूर्ण लंबित योजनाएं
इंदौर से मनमाड़ रेल लाइन, इंदौर-दाहोद रेल लाइन, गोधरा-दाहोद-झाबुआ-धार रेल लाइन, पीथमपुर-इंदौर रेल लाइन, झालावाड़ से रामगंज मंडी, ग्वालियर-शिवपुरी-कोटा ब्रॉड गेज व दो दर्जन ओवर ब्रिज,के अलावा कुछ छोटी रेल लाइनों का ब्रॉड गेज में परिवर्तन आदि शामिल हैं।
हालांकि रेलवे में निजी भागीदारी के प्रयास कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि मौजूद दौर में हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्टस् पूरा करने के लिए रेल्वे को राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की मदद चाहिए है, इससे तीनों पक्ष प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने में दिलचस्पी भी लेंगे और रेल्वे का आर्थिक बोझ कम होगा। कुछ राज्यों ने प्रारंभिक तौर पर हामी भर दी है, मप्र को भी बता दिया गया है,जल्द ही इसका खाका तय हो जाएगा।
राजनीतिक मुद्दा बनेगा: दूसरी ओर पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया का कहना है कि झाबुआ जैसे पिछड़े इलाके में 37 सौ करोड़ के दो बड़े रेल प्रोजेक्ट मौजूदा सरकार के आते ही ठप पड़ गए हैं, हम इन्हें राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। वहीं रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने हाल में लोकसभा में मप्र के एक लंबित प्रोजेक्ट के मामले में कहा है कि धन की उपलब्धता के आधार पर राशि जारी करने की चिंता की जाएगी।

– Source www.naidunia.com

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